
हरियाणा कैबिनेट ने दिल्ली – पानीपत – करनाल के बीच 136 किलोमीटर लंबे हाईस्पीड ट्रेन कॉरिडोर (RRTS) को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में लिए गए इस फैसले से अब हरियाणा का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली से सीधे और तेजी से जुड़ जाएगा। ‘नमो भारत’ के नाम से जानी जाने वाली इस परियोजना की कुल लागत 33,000 करोड़ रुपये से अधिक है। हरियाणा में कुल 11 स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है।
136 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर, हरियाणा सरकार देगी 7,472 करोड़
मंगलवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में 136 किलोमीटर लंबे दिल्ली – पानीपत – करनाल रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी गई। इससे हरियाणा का बड़ा हिस्सा दिल्ली-एनसीआर से हाईस्पीड सार्वजनिक परिवहन के जरिए जुड़ जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक है जिसमें हरियाणा सरकार 7,472 करोड़ रुपये देगी।
परियोजना के तहत हरियाणा में 11 स्टेशन बनाने का प्रस्ताव
इस परियोजना के तहत हरियाणा में 11 स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। ‘नमो भारत’ के नाम से जाने जाने वाले इस हाईस्पीड कॉरिडोर के डिपो के बुनियादी ढांचे की योजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) और संबंधित भूमि स्वामित्व एजेंसी द्वारा संयुक्त रूप से बनाई जाएगी। इसके लिए नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के प्रशासनिक सचिव को परियोजना का नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
करनाल से आगे कुरुक्षेत्र और साहा होते हुए पंचकूला तक जा सकता है कॉरिडोर
हरियाणा कैबिनेट ने यह भी इच्छा जताई कि इस RRTS कॉरिडोर को करनाल से आगे कुरुक्षेत्र और साहा होते हुए पंचकूला तक बढ़ाया जाए। अब इस प्रस्ताव को भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय एवं एनसीआरटीसी के सामने रखा जाएगा। माना जा रहा है कि इस कॉरिडोर के बनने से सफर का समय कम हो जाएगा। सड़कों पर भीड़ भी कम होगी। यही नहीं इसकी मदद से पलूशन को भी कंट्रोल करने में मदद मिलेगी।
हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट के नए बजट को भी मंजूरी
उम्मीद है कि यह कॉरिडोर रोजगार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाएगा और क्षेत्र का विकास करेगा। लगभग 6 घंटे चली मीटिंग में कैबिनेट ने हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) प्रोजेक्ट के नए बजट को मंजूरी दी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य कनेक्टिविटी सुधारना और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है। यह प्रोजेक्ट खरखौदा, मानेसर और सोहना जैसे बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब को सीधे रेल कनेक्टिविटी देगा।





