
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में एंट्री टैक्स का मुद्दा उठा। भाजपा विधायक राकेश जम्वाल, सुखराम चौधरी और कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने प्रश्नकाल में हिमाचल की गाड़ियों पर टैक्स को लेकर प्रश्न पूछा। इस पर सीएम ने जवाब में कहा कि जितना हल्ला हो रहा है, उतना बढ़ाया नहीं गया है। हिमाचल की केवल कमर्शियल गाड़ियों पर टैक्स लगा है। टोल की नीलामी के जरिये 185 करोड़ का लक्ष्य रखा था, बोली 228 करोड़ तक गई है।
रोजाना आने वालों को पास
कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने सदन में कहा कि मेरी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा पंजाब के साथ लगता है, वहां लोग हर रोज काम के सिलसिले में पंजाब आते जाते हैं, रिश्तेदारियां भी हैं, क्या सरकार रोज का काम करने आने वालों को पास देगी। सीएम बोले हिमाचल की गाड़ियों पर कोई टैक्स नहीं लगता है, इसको अब फास्टटैग के साथ जोड़ा गया है, हिमाचल के लोगों को पास देने पर विचार किया जा सकता है।
रोजाना आने वालों को मिले रियायत
पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुखराम चौधरी ने उत्तराखंड से हर रोज पांवटा के औद्योगिक क्षेत्र में आने वालों को रियायत देने की बात कही। नालागढ़ से कांग्रेस विधायक हरदीप बाबा ने इसका समर्थन किया। बाबा ने सदन में कहा कि सीमावर्ती इलाकों में कम से कम 5 किलोमीटर के दायरे के लोगों को पास दिया जाए। सीएम ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया।
तब तो तीन बैरियर पर टैक्स देना पड़ेगा
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने सदन में कहा कि पंजाब सरकार के वित्त मंत्री ने भी विधानसभा में एंट्री टैक्स लगाने और बैरियर लगाने की बात कही है, इससे बॉर्डर पर लोगों को 3 बैरियर पर टैक्स देना पड़ेगा, भारी बोझ जनता पर पड़ेगा, सरकार इस मुद्दे पर क्या कर रही है?
तथ्यों पर नहीं बोलते, पंजाब के मंत्री व भाजपा नेता
एंट्री टैक्स पर उठे सवालों पर सीएम सुक्खू ने कहा कि पंजाब के वित्त मंत्री तथ्यों पर नहीं बोलते, जयराम ठाकुर और अनुराग ठाकुर भी तथ्यों पर नहीं बोलते। पेट्रोल डीजल पर सेस को लेकर भी गलत तथ्य दिए, अभी केवल सेस लगाने के अधिकार के लिए बिल लाया है, इसको राज्यपाल की मंजूरी मिलनी है, उसके बाद सरकार ये तय करेगी कि सेस लगाना है या नहीं, हो सकता है सरकार कोई सेस न लगाए।
कैबिनेट में विचार किया जाएगा
इसके साथ ही एंट्री और टोल टैक्स मेरे समय से नहीं बल्कि 30 सालों से चल रहा है, इसे इनफ्लेशन देखते हुए निर्धारित किया गया है, अभी लागू नहीं किया है, कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर फिर से विचार किया जाएगा। विपक्ष राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए बयानबाजी कर रहा है।





