Viral

चीन के बिना ये हथियार नहीं बना पाएगा अमेरिका, ईरान युद्ध से कमजोर हुई ताकत

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध ने अमेरिका की सैन्य ताकत के एक अहम हिस्से को कमजोर कर दिया है. खासकर उसकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को बड़ा नुकसान हुआ है. इस सिस्टम में ऐसे रडार और इंटरसेप्टर शामिल होते हैं, जो दुश्मन की मिसाइल और ड्रोन को पहचानकर उन्हें हवा में ही मार गिराते हैं. लेकिन एक महीने से थोड़े ज्यादा समय में ईरान ने इन रडार सिस्टम्स को निशाना बनाया, जिससे कई सिस्टम खराब या नष्ट हो गए.

चीन के बिना ये हथियार नहीं बना पाएगा अमेरिका, ईरान युद्ध से कमजोर हुई ताकत
चीन के बिना ये हथियार नहीं बना पाएगा अमेरिका, ईरान युद्ध से कमजोर हुई ताकत

इन हथियारों को दोबारा तैयार करने के लिए अमेरिका को एक खास धातु गैलियम की जरूरत होती है. यह एक महत्वपूर्ण मिनरल है, जिसका इस्तेमाल सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, विंड टर्बाइन और मोबाइल-लैपटॉप चार्जर जैसे हाई-टेक प्रोडक्ट्स में भी होता है. लेकिन समस्या यह है कि गैलियम की प्रोसेसिंग पर चीन का लगभग पूरा नियंत्रण है.

चीन इसका फायदा कैसे उठाएगा?

जैसे-जैसे अमेरिका अपने हथियारों का स्टॉक फिर से भरने की कोशिश करेगा, गैलियम की मांग बढ़ेगी और इससे चीन की ताकत और बढ़ेगी. पिछले एक महीने में ही गैलियम की कीमत करीब 32% बढ़ चुकी है. इससे पहले भी चीन ने इस मिनरल की सप्लाई सीमित कर अमेरिका पर दबाव बनाया था, जिससे दोनों देशों के मिनकल के लिए बीच बातचीत शुरू हुई थी.

मिलिट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान के हमलों के कारण अमेरिका को एक मिसाइल गिराने के लिए कई इंटरसेप्टर इस्तेमाल करने पड़े. कुछ मामलों में एक मिसाइल को रोकने के लिए 10 से 11 इंटरसेप्टर तक दागे गए. इससे हथियारों का स्टॉक तेजी से खत्म हुआ.

अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री चीन पर निर्भर कैसे?

गैलियम के अलावा टर्बियम और डिस्प्रोसियम जैसे अन्य रेयर अर्थ मिनरल्स भी मिसाइल सिस्टम के लिए जरूरी होते हैं, और इनकी प्रोसेसिंग में भी चीन का 90% से ज्यादा नियंत्रण है. ऐसे में अगर सप्लाई में बाधा आती है, तो अमेरिका की डिफेंस इंडस्ट्री पर बड़ा असर पड़ सकता है. अभी ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्धविराम के दौरान अमेरिका अपने नुकसान का आकलन कर रहा है और यह देख रहा है कि सिस्टम को दोबारा बनाने में कितना समय लगेगा.

नया सप्लाई चेन बनाने की कोशिश

अमेरिका चीन पर निर्भरता कम करने के लिए नए सप्लाई चेन बनाने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया के साथ 3 अरब डॉलर का समझौता किया है, जिसमें गैलियम रिफाइनरी बनाने की योजना है. पेंटागन ने MP मटेरियल नाम की कंपनी में 400 मिलियन डॉलर का निवेश भी किया है, जो देश की इकलौती रेयर अर्थ माइन चलाती है. इसके अलावा सरकार ने 1.1 अरब डॉलर का बजट क्रिटिकल मिनरल्स के लिए तय किया है. फिर भी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इन कोशिशो में समय लगेगा और तब तक चीन अपनी पकड़ बनाए रखेगा.

khabarmonkey@gmail.com

Leave a Reply