
नई दिल्ली: Chandra Grahan Lunar Eclipse 2026: 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक असर भी पूरे देश में मान्य रहेगा। शास्त्रों के मुताबिक, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले लग जाता है। ऐसे में 3 मार्च की सुबह से ही सूतक शुरू हो जाएगा और शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद ही पूजा-पाठ और मांगलिक काम किए जा सकेंगे। इस बार चंद्र ग्रहण का संयोग होलाष्टक के समापन और होलिका दहन के आसपास बन रहा है, जिस वजह से होली की तारीख और मुहूर्त को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन बना हुआ है। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस बार 2 मार्च की रात को होलिका दहन किया जाएगा, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण रहेगा और 4 मार्च को रंगों वाली होली (धुलेंडी) मनाई जाएगी।
चंद्र ग्रहण की टाइमिंग: कब दिखेगा ‘ब्लड मून’?- 3 मार्च 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण ‘ब्लड मून’ के रूप में नजर आएगा। जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में चला जाता है, तो सूर्य की किरणें वातावरण से छनकर चंद्रमा तक पहुंचती हैं और वह लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है। चन्द्र ग्रहण प्रारम्भ (चन्द्रोदय के साथ) – 18:16 चन्द्र ग्रहण समाप्त – 18:46 चन्द्रोदय – 18:16
स्थानीय ग्रहण की अवधि – 30 मिनट 09 सेकण्ड्स उपच्छाया से पहला स्पर्श – 14:16 प्रच्छाया से पहला स्पर्श – 15:21
खग्रास प्रारम्भ – 16:35 परमग्रास चन्द्र ग्रहण – 17:04 खग्रास समाप्त – 17:33 प्रच्छाया से अन्तिम स्पर्श – 18:46 उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श – 19:52 खग्रास की अवधि – 57 मिनट 27 सेकण्ड्स खण्डग्रास की अवधि – 3 घण्टे 25 मिनट 17 सेकण्ड्स उपच्छाया की अवधि – 5 घण्टे 35 मिनट 45 सेकण्ड्स चन्द्र ग्रहण का परिमाण – 1.14 उपच्छाया चन्द्र ग्रहण का परिमाण – 2.18 भारत के कई हिस्सों में ग्रहण दिखाई देगा। कुछ शहरों में यह चंद मिनटों के लिए नजर आएगा। भले ही दृश्यता कम हो, लेकिन सूतक के नियम पूरे देश में मान्य रहेंगे।
भारत में सूतक काल: सुबह से ही थम जाएंगे शुभ काम धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले लग जाता है। यानी 3 मार्च 2026 को सुबह से ही सूतक का प्रभाव माना जाएगा।
सूतक प्रारम्भ – 09:30 सूतक समाप्त – 18:46 सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और भोजन पकाना व खाना वर्जित माना जाता है। हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को शास्त्रों में कुछ छूट दी गई है। इनके लिए सूतक दोपहर 03:35 बजे से प्रभावी माना जाएगा।
होलाष्टक और होलिका दहन पर क्या पड़ेगा असर?- 24 फरवरी से शुरू हुआ होलाष्टक 3 मार्च को खत्म हो रहा है और इसी दिन चंद्र ग्रहण भी है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण और सूतक काल के दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता। ऐसे में होलिका दहन 2 मार्च को ही किया जाएगा। सिंह राशि में ग्रहण: किन बातों का रखें ध्यान- यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में है। ज्योतिष के अनुसार सिंह राशि वालों के लिए यह समय थोड़ा मानसिक उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है। गुस्से पर काबू रखना और सेहत का ध्यान रखना जरूरी रहेगा। इस नक्षत्र के स्वामी शुक्र होते हैं, जो प्रेम और रिश्तों से जुड़ा ग्रह माना जाता है। ऐसे में पति-पत्नी या प्रेम संबंधों में गलतफहमियां और ईगो क्लैश की स्थिति बन सकती है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह है, इसलिए कई लोगों को भावनात्मक रूप से बेचैनी या पुरानी बातें याद आ सकती हैं।





