
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों का स्वागत करने जा रहे थे, तभी उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और वे धड़ाम से धरती पर आ गिरे. यह तस्वीर सिर्फ एक नेता के शारीरिक संतुलन खोने की नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान की कूटनीतिक हैसियत का सबसे सटीक उदाहरण है. जिसके अपने घर में भूचाल मचा है, वह ईरान जंग में ‘चौधरी’ बनने का सपना देख रहा है.
अमेरिका-ईरान जंग रुकवाने के लिए पाकिस्तान ने तीन बड़े इस्लामी देशों सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों के साथ रविवार को बैठक की. दावा किया गया कि पाकिस्तान दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध से बचा लेगा. लेकिन जब इस बैठक का नतीजा निकला, तो वह इशाक डार के उसी लड़खड़ाते कदमों जैसा साबित हुआ. धरातल पर कुछ नहीं बदला, बल्कि युद्ध की आग और ज्यादा भड़क गई.
इस्लामाबाद में हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान, तुर्किये के हाकन फिदान और मिस्र के बद्र अब्देलत्ती पहुंचे थे. इस बैठक का मुख्य एजेंडा था- एक महीने से चल रहे ईरान युद्ध को रोकना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खुलवाना. इसके बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मचा हुआ है और कीमतें आसमान छू रही हैं. पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान, दोनों का करीबी बताकर खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा है.
मिस्र की ओर से क्या था प्रस्ताव?
पाकिस्तानी सूत्रों के मुताबिक, रविवार की बैठक से पहले ही इन देशों ने व्हाइट हाउस को कुछ प्रस्ताव भेजे थे. इसमें सबसे अहम प्रस्ताव मिस्र की तरफ से था, जिसमें स्वेज नहर की तर्ज पर होर्मुज में भी फीस वसूलने का ढांचा तैयार करने की बात कही गई है. तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब मिलकर एक कंसोर्टियम बनाने पर विचार कर रहे हैं जो इस जलमार्ग से तेल की आवाजाही को नियंत्रित करेगा. इन देशों ने पाकिस्तान को भी इस कंसोर्टियम में शामिल होने का न्यौता दिया है.
प्रस्ताव पर अमेरिका का रिएक्शन
इस प्रस्ताव पर अमेरिका और ईरान दोनों के साथ चर्चा की गई है. यहां तक कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर लगातार अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के संपर्क में हैं. हालांकि, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालयों, सऊदी अरब के मीडिया कार्यालय और व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. तुर्किये के एक कूटनीतिक सूत्र ने सिर्फ इतना कहा कि तुर्की की पहली प्राथमिकता युद्धविराम है और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना एक बड़ा कदम हो सकता है.
मीटिंग का हासिल क्या रहा?
इशाक डार ने अपने तुर्की और मिस्र के समकक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं और बातचीत के जरिए कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ क्षेत्रीय तनाव पर व्यापक चर्चा की. लेकिन इस पूरी कवायद का हासिल क्या रहा? इशाक डार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि ईरान ने होर्मुज से 20 और पाकिस्तानी झंडे वाले जहाजों को गुजरने की अनुमति दे दी है. यानी दुनिया की शांति के नाम पर बुलाए गए इस बड़े जमावड़े में पाकिस्तान सिर्फ अपने 20 जहाजों का रास्ता साफ करवा पाया, जबकि मूल युद्ध अपनी जगह जस का तस खड़ा है.
ईरान का रुख…
इस बैठक में युद्ध के दो मुख्य पक्ष अमेरिका और इजरायल शामिल ही नहीं थे. मिस्र के विदेश मंत्री ने कहा कि यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच ‘सीधा संवाद’ स्थापित करने की एक कोशिश है, जो अब तक बिचौलियों के जरिए ही बात कर रहे हैं. कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को एक 15-सूत्रीय ‘एक्शन लिस्ट’ भेजी थी, जिसे शांति समझौते का ड्राफ्ट बताया गया था. लेकिन ईरानी अधिकारियों ने दबाव में आकर बातचीत करने के अमेरिकी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया.
इसके उलट, ईरान के सरकारी चैनल की अंग्रेजी विंग प्रेस टीवी ने एक अनाम अधिकारी के हवाले से बताया कि तेहरान ने अपना खुद का 5-सूत्रीय प्रस्ताव तैयार किया है. ईरान की मांग है कि उसके अधिकारियों की हत्याएं बंद हों, भविष्य में हमलों के खिलाफ गारंटी मिले, युद्ध का हर्जाना दिया जाए, दुश्मनी खत्म हो और होर्मुज पर ईरान का संप्रभु अधिकार माना जाए. इन दोनों प्रस्तावों के बीच इतना फासला है कि रविवार की बैठक से कोई भी ठोस रास्ता निकलता नहीं दिखा.
लेकिन धरातल पर कहानी कुछ और ही…
जब इस्लामाबाद में कूटनीति की मेज सजी थी, तब धरातल पर मिसाइलें बरस रही थीं. इजरायल ने रविवार को ऐलान किया कि ईरान की तरफ से उस पर हमलों की लहर आ रही है, और उसी समय तेहरान में भी कई जोरदार धमाके सुने गए. अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने हजारों अतिरिक्त मरीन और पैराट्रूपर्स भेज दिए हैं. हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को दावा किया था कि अमेरिका बिना जमीनी सेना उतारे ही अपने लक्ष्य हासिल कर लेगा. अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी युद्ध को जमीनी स्तर पर ले जाने और संभावित घुसपैठ का विरोध बढ़ रहा है.





