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क्रेडिट कार्ड का बिल बनता है जी का जंजाल? भारी जुर्माने से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

क्रेडिट कार्ड आज के समय में लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुका है. शॉपिंग, ऑनलाइन पेमेंट, ट्रैवल और इमरजेंसी खर्चों में यह काफी मददगार साबित होता है. इसके जरिए ग्राहक कैशलेस सुविधा के साथ कई रिवॉर्ड, कैशबैक और ऑफर्स का फायदा भी उठाते हैं. लेकिन अगर इसका इस्तेमाल सावधानी से नहीं किया जाए, तो यही सुविधा बड़ी आर्थिक परेशानी का कारण बन सकती है. समय पर बिल न भरने, ज्यादा खर्च करने या नियमों को नजरअंदाज करने पर भारी ब्याज और कई तरह के चार्ज लग सकते हैं. ऐसे में क्रेडिट कार्ड लेने से पहले उससे जुड़े सभी नियम और फीस को समझना बेहद जरूरी है.

क्रेडिट कार्ड का बिल बनता है जी का जंजाल? भारी जुर्माने से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
क्रेडिट कार्ड का बिल बनता है जी का जंजाल? भारी जुर्माने से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

सालाना मेंटेनेंस चार्ज

क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला सबसे सामान्य चार्ज सालाना मेंटेनेंस फीस होता है. इसे एनुअल फीस भी कहा जाता है. अलग-अलग कार्ड और बैंकों के अनुसार यह 250 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक हो सकती है. कई बैंक शुरुआत में फ्री कार्ड का ऑफर देते हैं, लेकिन बाद में उस पर फीस लगनी शुरू हो जाती है. इसलिए कार्ड लेने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि फ्री ऑफर कितने समय तक लागू रहेगा. कई बार ग्राहक बिना जानकारी के ऐसे कार्ड इस्तेमाल करते रहते हैं और बाद में भारी फीस चुकानी पड़ती है.

जॉइनिंग फीस

जॉइनिंग फीस वह रकम होती है जो ग्राहक से कार्ड जारी होने के समय ली जाती है. यह एक बार का चार्ज होता है और कार्ड के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. आमतौर पर यह फीस ₹250 से ₹50,000 तक हो सकती है. कई बैंक प्रीमियम कार्ड्स पर ज्यादा जॉइनिंग फीस लेते हैं, लेकिन बदले में रिवॉर्ड पॉइंट, ट्रैवल बेनिफिट या लाउंज एक्सेस जैसी सुविधाएं देते हैं. ग्राहक को यह जरूर जांचना चाहिए कि मिलने वाले फायदे फीस के मुकाबले सही हैं या नहीं.

कैश एडवांस फीस

क्रेडिट कार्ड से ATM के जरिए नकद पैसा निकालने की सुविधा भी मिलती है, लेकिन यह सबसे महंगी सुविधाओं में से एक मानी जाती है. बैंक हर ट्रांजैक्शन पर निकाली गई रकम का करीब 2.5% तक चार्ज वसूलते हैं. इसके अलावा इस रकम पर पहले दिन से ही ब्याज लगना शुरू हो जाता है. इसमें कोई इंटरेस्ट-फ्री पीरियड नहीं मिलता. यही वजह है कि फाइनेंशियल एक्सपर्ट जरूरत पड़ने पर ही कैश एडवांस सुविधा इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.

लेट पेमेंट चार्ज

Khabar Monkey

अगर ग्राहक तय समय पर क्रेडिट कार्ड का बिल जमा नहीं करता, तो बैंक लेट पेमेंट फीस लगाते हैं. कई लोग सिर्फ मिनिमम अमाउंट भरकर बाकी रकम छोड़ देते हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त ब्याज भी लगने लगता है. लगातार लेट पेमेंट करने से क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है और भविष्य में लोन मिलने में परेशानी आ सकती है. इसलिए हमेशा ड्यू डेट से पहले पूरा बिल चुकाने की सलाह दी जाती है.

सालाना परसेंटेज रेट (APR)

APR क्रेडिट कार्ड का ब्याज दर होता है. यह उन बकाया रकम पर लगाया जाता है जो ग्राहक समय पर नहीं चुका पाता. भारत में कई क्रेडिट कार्ड पर यह ब्याज दर 33% से 42% सालाना तक पहुंच जाती है. कुछ मामलों में यह 50% तक भी हो सकती है. ऐसे में छोटा बकाया भी धीरे-धीरे बड़े कर्ज में बदल सकता है. एक्सपर्ट मानते हैं कि इस चार्ज से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि हर महीने पूरा बिल समय पर चुकाया जाए.

क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते समय ग्राहकों को सिर्फ ऑफर्स और कैशबैक पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि उससे जुड़े चार्ज, नियम और ब्याज दरों को भी अच्छी तरह समझना चाहिए. सही जानकारी और जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल किया जाए तो क्रेडिट कार्ड फायदेमंद साबित हो सकता है, लेकिन लापरवाही इसे आर्थिक बोझ में बदल सकती है.

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