
Drinking Water While Standing: अक्सर आपने बड़े-बुजुर्गों या घरेलू नुस्खों की बात करने वालों से सुना होगा कि खड़े होकर पानी पीना घुटनों के लिए नुकसानदेह होता है. कहा जाता है कि इस आदत से जोड़ों में दर्द, आर्थराइटिस जैसी परेशानियां हो सकती हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या वाकई खड़े होकर पानी पीना घुटनों पर असर डालता है, या ये सिर्फ एक मिथ है? आइए साइंटिफिक और आयुर्वेदिक दोनों नजरियों से इसकी सच्चाई जानने की कोशिश करते हैं.
मिथ या सच?
मशहूर न्यूट्रीशनिस्ट निखिल वत्स (Nikhil Vats) ने बताया कि साइंटिफिक रिसर्च में अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि खड़े होकर पानी पीने से सीधे घुटनों पर असर पड़ता है. हां, ये जरूर है कि खड़े होकर तेजी से पानी पीने पर पानी तेजी से शरीर में दाखिल हो जाता है, जिससे पेट और किडनी पर हल्का प्रेशर पड़ सकता है. ये असर डाइजेशन और यूरिनेशन से जुड़ा है, न कि घुटनों की सेहत से.
दूसरी तरफ, आयुर्वेद और पारंपरिक मान्यताओं के मुताबिक खड़े होकर पानी पीना शरीर में “वात दोष” को बढ़ा सकता है. माना जाता है कि इससे हड्डियों और जोड़ों में सूखापन और दर्द की समस्या धीरे-धीरे हो सकती है. यही वजह है कि बुजुर्ग बैठे-बैठे पानी पीने की सलाह देते हैं.
खड़े होकर पानी पीने के नुकसान
1. डाइजेशन पर असर: खड़े होकर पानी पीने से पानी तेज़ी से पेट में पहुंचता है, जिससे गैस्ट्रिक जूस और पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
2. किडनी पर दबाव: तेजी से आने वाला पानी किडनी को फिल्टर करने में ज्यादा मेहनत करवाता है.
3. नर्वस सिस्टम पर असर: आयुर्वेद मानता है कि ये आदत नर्वस सिस्टम को असंतुलित करती है, जिससे शरीर में तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है.
क्या घुटनों पर असर पड़ता है?
साइंटिफिक नजरिये से अब तक ऐसा कोई मेडिकल एविडेंस नहीं है कि खड़े होकर पानी पीने से आर्थराइटिस या घुटनों की बीमारी होती है. आयुर्वेदिक नजरिये से देखें तो वात दोष के बढ़ने से लॉन्ग टर्म में हड्डियों और जोड़ों में कमजोरी आ सकती है. इसे सीधे-सीधे घुटनों पर असर मानना सही नहीं, लेकिन इनडायरेक्टली से ये माना जा सकता है.
सही तरीका क्या है?
1. बैठकर आराम से पानी पिएं.
2. छोटे-छोटे घूंट लें, न कि एक ही बार में बहुत सारा पानी.
3. तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी सुबह पीना शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है.





