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कौन है Handala Hackers? ईरान की ‘साइबर सेना’ का खौफनाक चेहरा! वो हैकिंग ग्रुप जिसने 24 घंटे में FBI को दे दी चुनौती


Who are Handala Hackers: हाल ही में Federal Bureau of Investigation (FBI) ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें ईरान से जुड़े एक साइबर हैकर ग्रुप के बारे में बताया गया है. इस ग्रुप का नाम Handala बताया जा रहा है, जो Telegram का इस्तेमाल करके लोगों के डिवाइस में मैलवेयर फैलाता है. रिपोर्ट के अनुसार, ये हैकर्स खास तौर पर सरकार के विरोधियों, पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स को निशाना बना रहे हैं. माना जा रहा है कि यह ग्रुप Ministry of Intelligence and Security (MOIS) से जुड़ा हो सकता है और ईरान-इजराइल तनाव के दौरान एक्टिव है.

कैसे काम करता है यह साइबर अटैक
इन हैकर्स का तरीका काफी चालाकी भरा होता है. सबसे पहले ये एक फर्जी मैसेज भेजते हैं, जो किसी भरोसेमंद व्यक्ति या टेक सपोर्ट के नाम से आता है. इस मैसेज में एक लिंक या फाइल होती है, जो देखने में सुरक्षित लगती है. जैसे ही कोई यूजर उस फाइल को डाउनलोड करता है, उसके डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है. इसके बाद यह मैलवेयर सीधे हैकर्स के कंट्रोल वाले टेलीग्राम बॉट से जुड़ जाता है. एक बार कनेक्शन बनने के बाद हैकर्स यूजर का पर्सनल डेटा देख सकते हैं, मैसेज पढ़ सकते हैं, स्क्रीनशॉट ले सकते हैं और यहां तक कि कॉल रिकॉर्ड भी कर सकते हैं, बिना यूजर को पता चले.

Handala ग्रुप की असली पहचान
FBI ने अपनी रिपोर्ट में Handala को एक “फेक हैक्टिविस्ट” ग्रुप बताया है. यानी यह खुद को एक्टिविस्ट ग्रुप की तरह दिखाता है, लेकिन असल में यह एक संगठित साइबर ऑपरेशन का हिस्सा हो सकता है. साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ग्रुप ईरान की इंटेलिजेंस एजेंसी द्वारा चलाया जा सकता है और इसे “Void Manticore” नाम के यूनिट से जोड़ा जाता है. यह ग्रुप आम हैकर्स की तरह फिरौती नहीं मांगता, बल्कि डेटा को पूरी तरह नष्ट करने के लिए खास तरह के “वाइपर मैलवेयर” का इस्तेमाल करता है. इसका मकसद सिस्टम को नुकसान पहुंचाना और लोगों को डराना होता है.

बड़े हमलों में भी आया नाम
Handala ग्रुप ने हाल ही में मेडिकल टेक कंपनी Stryker पर साइबर अटैक की जिम्मेदारी ली थी. इस हमले में हजारों डिवाइस का डेटा मिटा दिया गया था. इसके अलावा इस ग्रुप ने इजराइल के Soreq Nuclear Research Center पर डेटा ब्रीच का दावा भी किया था, जिससे इसकी क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

Telegram क्यों बना हैकर्स का पसंदीदा प्लेटफॉर्म
सवाल यह है कि आखिर ये हैकर्स Telegram का ही इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, टेलीग्राम एक बेहद लोकप्रिय ऐप है, जिसे करोड़ों लोग रोज इस्तेमाल करते हैं. इसकी वजह से हैकर्स की गतिविधियां सामान्य बातचीत में आसानी से छिप जाती हैं. इसके अलावा, इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन भी होता है, जिससे इन साइबर हमलों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है.

क्या है यूजर्स के लिए खतरा
FBI का मानना है कि ये हमले ईरान की खुफिया एजेंसियों से जुड़े हो सकते हैं. ऐसे हैकर ग्रुप्स का मकसद लोगों की जासूसी करना, उनकी जानकारी चुराना और सिस्टम को नुकसान पहुंचाना होता है. हालांकि, इन आरोपों पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. वहीं, टेलीग्राम के प्रवक्ता ने कहा है कि प्लेटफॉर्म पर ऐसे अकाउंट्स को लगातार हटाया जाता है जो मैलवेयर फैलाने में शामिल होते हैं.

कैसे बचें ऐसे साइबर हमलों से
इस तरह के खतरों से बचने के लिए जरूरी है कि किसी भी अनजान लिंक या फाइल को डाउनलोड करने से पहले सावधानी बरतें. अगर कोई मैसेज संदिग्ध लगे, तो उसे नजरअंदाज करना ही बेहतर होता है.

khabarmonkey@gmail.com

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