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‘कोर्ट से बड़ा कोई नहीं’, BJP नेता ने विनेश को एशियाड ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति देने के फैसले का किया स्वागत

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता बबीता फोगट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें पहलवान विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की इजाजत दी गई है। दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के विनेश को घरेलू कुश्ती प्रतियोगिता के लिए अयोग्य घोषित करने के बाद आया है।

‘कोर्ट से बड़ा कोई नहीं’, BJP नेता ने विनेश को एशियाड ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति देने के फैसले का किया स्वागत
‘कोर्ट से बड़ा कोई नहीं’, BJP नेता ने विनेश को एशियाड ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति देने के फैसले का किया स्वागत

विनेश की चचेरी बहन खुद एक पूर्व रेसलर हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला सही है और उन्होंने इसका स्वागत किया। बबीता ने एएनआई से कहा, ‘मैं कोर्ट का फैसला मानती हूं और कोर्ट का फैसला सही है। जो भी हो, कोर्ट ने अपना फैसला पहले ही दे दिया है। कोर्ट से बड़ा कुछ नहीं है, इसलिए हमें कोर्ट के फैसले का स्वागत करना चाहिए और कोर्ट को धन्यवाद देना चाहिए।’

दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने शनिवार (23 मई) को न सिर्फ विनेश को एशियन गेम्स के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की इजाजत दी, बल्कि यह भी आदेश दिया कि ट्रायल की वीडियो-रिकॉर्डिंग की जाए और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) के स्वतंत्र पर्यवेक्षक उसकी निगरानी करें।

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डब्ल्यूएफआई ने विनेश को कारण बताओ नोटिस जारी किया था

डब्ल्यूएफआई ने 9 मई को विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। फेडरेशन ने विनेश के खिलाफ कई मुद्दे उठाए, जिसमें 2024 ओलंपिक के दौरान वजन का मानक पूरी न कर पाना, एंटी-डोपिंग में ठिकाने न बता पाना और ओलंपिक क्वालिफायर के ट्रायल्स के दौरान दो वजन कैटेगरी में हिस्सा लेना शामिल है।

डब्ल्यूएफआई की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना

कोर्ट ने पेरिस ओलंपिक 2024 के वजन वाले विवाद पर विनेश फोगाट को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में डब्ल्यूएफआई की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की। घटना को “राष्ट्रीय शर्मिंदगी” बताने वाली टिप्पणियों का जिक्र करते हुए पीठ ने ऐसी टिप्पणियों को “निंदनीय” बताया और कहा कि वे बदले की भावना से की गई और पहले से सोची-समझी लगती हैं, खासकर तब जब कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फार स्पोर्ट ने पहले ही यह कह दिया था कि फोगाट की तरफ से कोई गलत काम नहीं हुआ था।

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