
India Oil Export: ईरान युद्ध की वजह से भारत के तेल और गैस के आयात पर बुरा असर पड़ा है. मिडिल ईस्ट युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है. भारत के ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इस रास्ते से होकर गुजरता है. भारत, जो खुछ सप्लाई संकट का सामना कर रहा है. मुश्किल वक्त में भी अपने पड़ोसियों की मदद के लिए खड़ा है. ऊर्जा संकट के बीच भारत ने बांग्लादेश को डीजल 5000 टन डीजल, श्रीलंका को 38000 टन, भूटान को 24000 टन, नेपाल को 210000 टन तेल भेजा है. कई लोगों के मन में सवाल उठे कि जब हम खुद मुश्किल में हैं, तो दूसरों को तेल क्यों भेज रहे हैं? भारत, जो खुद तेल और गैस के आयात पर टिका है, वो दूसरों को तेल क्यों भेज रहा है? अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं तो भारत के ऑयल सिस्टम को समझना जरूरी है.
तेल और गैस का आयात करता है भारत ?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. अगर आंकड़ों को देखें तो भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% फीसदी तक बाहरी देशों से खरीदता है. Fy 2023-24 में 232.5 मिलियन मीट्रिक टन इंपोर्ट किया गया. भारत सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 40 से अधिक देशों से तेल की खरीदारी की जाती है. जिसमें रूस सबसे बड़ी आयातक है, जहां से करीब 37-40% तेल इंपोर्ट किया जाता है. इसके अलावा इराक से 21%, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात , कुवैत, अमेरिका, वेनेजुएला जैसे तमाम देश शामिल है. इसी तरह से गैस की बात करें तो भारत कतर से 40-45%, ऑस्ट्रेलिया से 15-20%, संयुक्त राज्य अमेरिका से 10-12%, इसी तरह से रूस, ओमान, नाइजीरिया, अंगोला से गैस का आयात करता है.
आयात करने वाला क्यों बेचता है पेट्रोल-डीजल ?
भारत कच्चे तेल और नेचुरल गैस, एलपीजी गैस का आयात करता है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के निर्यात में अव्वल है. ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच मार्च में भारत का डीजल निर्यात 20% तक उछल गया. Kpler के डेटा के मुताबिक 1 मार्च 28 मार्च के बीच भारत ने 12.90 मिलियन बैरल डीजल एक्सपोर्ट किया, जो फरवरी में 10.74 मिलियन बैरल था . भारत कच्चे तेल का आयात करता है और अपनी विकसित रिफाइनिंग प्रणाली की बदौलत पेट्रोल-डीजल को रिफाइन कर ना केवल अपनी घरेलू जरूरत को पूरा करता है, बल्कि दूसरे देशों को बेचकर विदेशी मुद्रा हासिल करता है.
समझिए कैसे काम करता है भारत का ऑयल सिस्टम ?
भारत के पास बेहतरीन रिफाइनिंग फैसिलिटी है. इस रिफाइनिंग सिस्टम की बदौलत भारत तेल का प्रोड्यूसर न होते हुए भी तेल का प्रोसेसर बनकर अरबों की कमाई कर रहा है. कच्चे तेल की रिफाइनिंग करके वो पेट्रोल-डीजल का एक्सपोर्ट करता है. Observatory of Economic Complexity के डेटा के मुताबिक साल 2024 में भारत ने 65.4 अरब डॉलर का पेट्रोलियम एक्सपोर्ट किया. भारत पेट्रोलियम का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है. भारत नीदरलैंड्स, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर समेत दर्जनों देशों को पेट्रोल-डीजल का निर्यात करता है.
भारत के पास कितना तेल है ?
भारत के पास पर्याप्त तेल है. होर्मुज संकट के बीच उसने 40 से अधिक देशों से तेल का आयात किया है. भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 64% तक है, वहीं कुल तेल भंडार 74 दिनों का है . यानी अगले दो महीनों तक भारत में तेल की कोई दिक्कत नहीं होगी. घरेलू सप्लाई में दिक्कत नहीं हो, इसके लिए हाल ही में भारत ने डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर निर्यात शुल्क लगाया है.





