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कभी चले थे आंख दिखाने, अब संकट में फंसे तो भारत से लगा रहे गुहार, तेल भेज दो प्लीज


कहते हैं दुनिया गोल है. आज न कल वापस चीजें घूमकर उसी जगह पर लौट जाती हैं. दोस्ती-दुश्मनी का खेल भी कुछ इसी तरह का है. मालदीव और बांग्लादेश कभी अच्छे दोस्त थे, फिर दुश्मन बने और फिर दोस्त बनते जा रहे हैं. कभी-कभी दोस्ती-दुश्मनी का खेल भी कितना अजीब हो जाता है… जिसको दुत्कारते हैं, उसी से मदद मांगते हैं. यह आज इन दो देशों के उदाहरण से समझ सकते हैं. ये वो दो देश हैं, जो कुछ समय पहले तक भारत को आंखें दिखा रहे थे. भारत से खुलकर दुश्मनी मोल रहे थे. भारत को अपने आगे कुछ समझना ही नहीं चाहते थे. मगर आज मुश्किल में फंसे हैं तो औकात पता चल गई है. ईरान जंग में संकट ने ऐसे जकड़ा है कि इन दोनों को भारत की याद आ रही है. अब मालदीव हो या बांग्लादेश… दोनों भारत से गुहार लगा रहे हैं. भाई, प्लीज तेल भेज दो. जी हां, खुद भारत सरकार ने बताया है कि ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच ये देश भारत से फ्यूल यानी ईंधन की मांग कर रहे हैं.

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को बताया कि मालदीव भारत से ईंधन की सप्लाई चाहता है और भारत अपने पड़ोसी देशों को लगातार ईंधन भेज रहा है. उन्होंने बताया कि दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर भारत कमर्शियल समझौतों के तहत बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को ईंधन की सप्लाई कर रहा है. वहीं, मालदीव ने शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों आधार पर पेट्रोलियम उत्पाद मांगे हैं. भारत अपनी जरूरत और उपलब्धता देखकर इस पर विचार कर रहा है. इसका मतलब है कि भारत अभी बांग्लादेश को ईंधन की मदद भेज रहा है. वहीं मालदीव की मांग पर अभी विचार कर रहा है.

मालदीव क्यों संकट में फंसा
विश्व बैंक के डेटा के अनुसार, मालदीव आमतौर पर अपना अधिकतर ईंधन ओमान से लेता है. ईरान-अमेरिका जंग के कारण पश्चिम एशिया से तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की शिपिंग में रुकावट आई है. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया. इससे मालदीव का ईंधन सप्लाई बंद हो चुका है. होर्मुज वाला यह रास्ता तेल और गैस का सबसे बड़ा हाईवे है. होर्मुज बंद होने से जहाज फंस गए हैं सप्लाई रुक गई है. मालदीव जैसे छोटे द्वीप देश के लिए यह बड़ा संकट है. बांग्लादेश भी इसी वजह से परेशान है और भारत से फ्यूल मांग रहा है.

क्यों भारत से मांग रहे मदद
यहां बताना जरूरी है कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है. वह पहले से ही बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को कमर्शियल आधार पर तेल देता आ रहा है. हाल ही में श्रीलंका को 38,000 टन पेट्रोलियम भेजा गया. बांग्लादेश को भी पाइपलाइन से डीजल की खेपें पहुंच रही हैं. अब मालदीव की नई मांग पर भारत सोच रहा है. होर्मुज बंद होने के बाद भी अब तक भारत खाड़ी क्षेत्र से छह LPG कैरियर निकालने में कामयाब रहा है. वहीं कई तेल टैंकर भी भारत आए हैं.

बांग्लादेश और मालदीव की दुश्मनी वाली कहानी
लेकिन यहां सबसे मजेदार बात है पुरानी कहानी. जी हां, मालदीव के राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जू ने तो खुलेआम ‘इंडिया आउट’ का नारा दिया था. वह चीन की गोद में जाकर बैठ गए थे और भारत से दुश्मनी मोल ली थी. इतना ही नहीं, मालदीव की तरह बांग्लादेश ने भी वही हरकत की थी. बांग्लादेश में यूनुस के नेतृत्व में भी भारत से पंगा लिया गया. दोनों देश चीन की गोद में बैठकर भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे. उन्हें लगता था भारत बिना भी चल जाएगा. अब देखिए कि जब संकट आया तो भारत ही संकट का साथी बना है. मालदीव और बांग्लादेश को भारत ही याद आया है.

भारत का दिल है बहुत बड़ा
भारत का दिल बहुत बड़ा है. वह संकट का साथी कहलाता है. अपने पड़ोसियों को कभी अकेला नहीं छोड़ता. चाहे यूक्रेन जंग हो या इजरायल फिलिस्तीन. पड़ोसियों के नागरिकों को भी भारत ने निकाला था. अब जब ईरान जंग से संकट है तो भारत ने अपने पुराने दोस्तों से मौजूदा दुश्मनी के चलते मुंह नहीं फेरा है. भारत बांग्लादेश को मदद तो क रहा है, मगर मालदीव को इनकार भी नहीं किया है. भारत ने केवल अपनी जरूरत देखकर मदद करने की बात की है. यह भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति का कमाल है. हालांकि, यह भी हकीकत है कि भारत खुद भी मुश्किल में है. भारत के 18 तेल-गैस वाले जहाज अभी भी होर्मुज में फंसे हैं. ईरान से बात चल रही है ताकि टैंकर सुरक्षित निकल सकें. फिर भी भारत पड़ोसियों की मदद करने को तैयार है.

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