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ओले और भारी बारिश से फसलों पर मंडराया संकट, बारिश का अनुमान


नई दिल्ली। उत्तर भारत में मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जहां उत्तर प्रदेश, राजस्थान हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में अचानक हुई ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते अप्रैल की शुरुआत में ही मौसम ने करवट ली है।

आज इन राज्यों में होगी बारिश
वहीं, आज भी उत्तर भारत के कई इलाकों में मध्यम से भारी बारिश और ओले गिरने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में आज सुबह से ही बादल छाए हुए हैं। दोपहर और शाम के समय इन क्षेत्रों में तेज गरज-चमक के साथ बारिश और कुछ स्थानों पर ओले गिरने की प्रबल संभावना है।

ओलावृष्टि से फसल हुई बेकार
हरियाणा के भिवानी, हिसार, रोहतक और सोनीपत जैसे जिलों में भारी ओलावृष्टि की खबरें हैं, जिससे तैयार खड़ी सरसों, गेहूं और रबी की अन्य फसलों को 50 प्रतिशत से अधिक का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

उत्तर प्रदेश के मथुरा, अलीगढ़ और हाथरस जिलों में भी बेमौसम बारिश और ओलों ने आलू और गेहूं की फसल को काफी क्षति पहुंचाई है, जिसके बाद प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी (फसल नुकसान मूल्यांकन) के निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली-एनसीआर में होने लगे बादल
दिल्ली-एनसीआर में भी गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और रुक-रुक कर बारिश होने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है और तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। आज फिर बारिश की संभावना जताई जा रही है।

राजस्थान में बिछ गई ‘बर्फ’ की चादर
राजस्थान में शुक्रवार को अधिकांश जिलों में बारिश के साथ ओले गिरे। आज फिर बारिश और ओले गिरने की संभावना है। कई जिलों में धूलभरी हवाओं का दौर भी चला। बारिश,ओले और हवाओं के कारण तापमान में गिरावट हुई है। बारिश और ओले के कारण खेतों तैयार खड़ी फैसल को काफी नुकसान हुआ है।

जयपुर,अजमेर,डीडवाना-कुचामन, नागौर, जालौर, दौसा, बीकानेर, चूरू, सीकर, ब्यावर सहित कई जिलों में तेज बारिश के साथ ओले गिरे हैं। इस कारण खेतों में तैयार खड़ी गेंहू एवं सरसों की फसल को नुकसान हुआ है।

मैदानी इलाकों में 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार चलेंगे हवाएं
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, यह मौसमी उथल-पुथल 5 अप्रैल तक जारी रह सकती है, जिसमें उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अब अप्रैल के महीने में भी बढ़ रहा है, जो कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है।

किसानों को दी गई है सलाह
किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें और सिंचाई व कीटनाशकों के छिड़काव को फिलहाल टाल दें। आने वाले सप्ताह में 6 अप्रैल के बाद ही मौसम के साफ होने और तापमान में फिर से बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है, जिससे लोगों को इस बेमौसम ठंड से राहत मिलेगी।

khabarmonkey@gmail.com

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