
कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए सचिव गोपन शैलेश बगौली ने बताया कि नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कार्यक्रम के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ वचन-पत्र देना होगा, जिसमें आयोजक संभावित क्षति की पूरी जिम्मेदारी लेगा। प्रदर्शन के दौरान हथियार, ज्वलनशील पदार्थ और खतरनाक रसायनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। घटनाओं की पारदर्शी जांच को हर थाने में वीडियोग्राफी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे दोषियों की पहचान और जिम्मेदारी तय करने में आसानी होगी।
क्षति के दावों के निस्तारण को सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश के स्तर पर दावा अधिकरण का गठन किया जाएगा। इसमें अपर आयुक्त, राजस्व सदस्य होंगे। दावा आयुक्त साक्ष्य विश्लेषण और दावों के पंजीकरण की प्रक्रिया संभालेंगे।
भवनों की क्षति का आकलन सर्किल रेट और निर्माण की स्थिति के आधार पर होगा, जबकि चल संपत्ति का मूल्यांकन बाजार दरों से किया जाएगा। अस्पतालों, सरकारी संस्थानों व धरोहरों को नुकसान पहुंचाने पर अतिरिक्त क्षतिपूर्ति भी लगाई जा सकेगी।
दंगाइयों पर नकेल कसने को ऐसे ही प्रविधान उत्तर प्रदेश की नियमावली में भी हैं। उत्तर प्रदेश के अलावा यह लोक एवं निजी संपत्ति की क्षति पर वसूली के लिए हरियाणा में भी कानून बने हुए हैं। उत्तराखंड ऐसा करने वाला तीसरा राज्य है।
सरकार ने पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों को स्वरोजगार के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के अंतर्गत अब इन वर्गों को विशेष लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके तहत योजना में 10 प्रतिशत कोटा पूर्व सैनिकों, जिनमें अग्निवीर भी शामिल हैं, के लिए आरक्षित होगा। साथ ही, स्वरोजगार के लिए दिए जाने वाले बैंक ऋण पर उन्हें पांच प्रतिशत अतिरिक्त छूट (उपादान) देने का निर्णय लिया गया है।
सरकार ने कुछ समय पूर्व वर्दीधारी सेवाओं के लिए एक नियमावली बनाई थी। इसमें वर्दीधारियों के लिए आयुसीमा तय की गई थी। इसमें कुछ पदों में आयुसीमा घटाई गई थी। अब युवाओं की सुविधा के दृष्टिगत ऐसे पदों पर पूर्व की भांति ही आयु सीमा रहेगी। इन पदों पर वर्ष 2028 के बाद आयुसीमा के नियम लागू होंगे।





