पाकिस्तान में शांति समझौते की बैठक का परिणाम भले कुछ न निकला हो, लेकिन इस मीटिंग ने अमेरिका को जंग से बाहर निकलने का रास्ता जरूर दे दिया है. इस मीटिंग के बाद वाशिंगटन से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे कहा जा रहा है कि बिना किसी ठोस समझौते के भी अमेरिका युद्ध से बाहर हो सकता है. इसकी पटकथा भी मिडिल ईस्ट में लिखी जा रही है. इस बात की चर्चा इसलिए भी है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति अब जंग लड़ने के मूड में नहीं हैं.

द इकॉनोमिस्ट के मुताबिक जंग की शुरुआत में ट्रंप को लग रहा था कि वे हमले के जरिए सब कुछ हासिल कर सकते हैं. अब उन्हें पता है कि हमले से उनका फायदा हो न हो, नुकसान जरूर हो सकता है.
बिना समझौते के बाहर निकलने की चर्चा क्यों?
1. इस्लामाबाद वार्ता से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को बड़ी धमकी दी थी. ट्रंप ने कहा था कि अगर समझौता फेल होता है, तो हम तेहरान को इससे भी बड़ा दर्द देंगे. रविवार (12 अप्रैल) को दोनों के बीच समझौता फेल हो गया. इसके बाद भी अमेरिका की तरफ से ईरान पर कोई हमला नहीं हुआ.
उलटे ट्रंप ने ईरान के बदले के आउटर पर फोकस किया है. अमेरिका ने ऐलान किया है कि होर्मुज से ईरान को टोल देकर जो भी जहाज ओमान की खाड़ी में एंटर करेगा, उसे मार दिया जाएगा. दिलचस्प बात है कि अमेरिका अब तक होर्मुज को क्लियर कराने की बात कर रहा था, लेकिन अब उसने खुद इस रास्ते को ब्लॉक करने की घोषणा की है.
यह इसलिए कि ट्रंप ईरान को लेकर दुनिया पर दबाव बढ़ाना चाहते हैं, जिससे दुनिया के देश इस मसले पर उनसे बात करे. ट्रंप इसे जीत के तौर पर पेश करना चाहते हैं.
2. पीस डील पर बात बन जाए, यह आसान नहीं है. क्योंकि, ईरान झुकने के मूड में नहीं है. ईरान ने यूरेनियम संवर्धित को शिफ्ट करने से इनकार कर दिया है. उसका कहना है कि हम यूरेनियम को ईरान में ही पतला करेंगे. ईरान ने होर्मुज पर टोल वसूली की मांग की है. 2015 में जो अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हुआ था, ट्रंप वैसा समझौता भी नहीं कर पा रहे हैं.
ऐसे में ट्रंप अगर किसी नए समझौते को फाइनल करते हैं, जो 2015 से कमतर साबित होता है तो उनकी मुसीबत बढ़ सकती है. इस साल के आखिर में अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन प्रस्तावित है. ऐसे में ट्रंप मामले को होल्ड पर ही रखना चाहते हैं.
3. जंग में पहली बार सऊदी अरब में पाकिस्तान के सैनिकों की तैनाती की गई है. दरअसल, खाड़ी के देशों को यह आभास है कि ट्रंप उन्हें अकेले छोड़ सकते हैं. इसलिए खाड़ी के देश खुद की सुरक्षा व्यवस्था में जुट गई है. सऊदी ने अपनी सुरक्षा के लिए 13 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को रियाद बुलाया है.
इसी तरह कुवैत, यूएई और कतर ने भी अपनी सुरक्षा के इंतजाम शुरू कर दिए हैं. अमेरिका की कोशिश मिडिल ईस्ट को अधूरे जंग में छोड़ कर जाने की भी है, जिससे मिडिल ईस्ट के देश सुरक्षा के नाम पर जमकर उससे हथियार खरीदे.
4. वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ईरान युद्ध में अब आगे बढ़ने का मतलब है- सैनिकों को जमीन पर उतारना. राष्ट्रपति जानते हैं कि इसका फायदा कुछ हो न हो, लेकिन नुकसान जरूर हो सकता है. ऐसे में राष्ट्रपति ट्रंप इसको लेकर रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं.
यही वजह है कि ट्रंप ने पाकिस्तान के सहारे से जंग से खुद को बाहर निकाल लिया है. अब ट्रंप चाहते हैं कि जो भी प्रक्रिया हो. आराम से हो. उन्हें इसमें कोई जल्दबाजी नहीं है.





