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ईरान ने जैसे बढ़ाई दुनिया की मुश्किलें वैसे ही अब भारत चीन के लिए करेगा, ये है पूरा प्लान

ईरान ने दुनिया को दिखाया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद किस तरह एक संकरी समुद्री गलियारे (चोकपॉइंट) को रणनीतिक हथियार में बदला जा सकता है. अब भारत भी इसी मॉडल को अपने तरीके से अपनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन कहीं ज्यादा बड़े और आधुनिक स्तर पर, जिससे चीन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

ईरान ने जैसे बढ़ाई दुनिया की मुश्किलें वैसे ही अब भारत चीन के लिए करेगा, ये है पूरा प्लान
ईरान ने जैसे बढ़ाई दुनिया की मुश्किलें वैसे ही अब भारत चीन के लिए करेगा, ये है पूरा प्लान

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सस्ते समुद्री बारूदी सुरंग, ड्रोन बोट, एंटी-शिप मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का इस्तेमाल कर बार-बार वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित करने की धमकी दी है. दुनिया का करीब 20 फीसद तेल इसी रास्ते से गुजरता है. ईरान को हर जहाज डुबाने की जरूरत नहीं होती कुछ हमले, माइंस और नेविगेशन जाम ही बाजार में हड़कंप मचाने के लिए काफी होते हैं.

भारत की नजर मलक्का स्ट्रेट पर

अब भारत इसी रणनीति को Strait of Malacca में लागू करने की सोच रहा है, जो चीन के लिए कहीं ज्यादा अहम है. चीन का लगभग 80 फीसद तेल आयात और बड़ा व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है. सबसे बड़ी बात भारत इस स्ट्रेट के पश्चिमी गेट पर स्थित है और उसके पास Andaman और Nicobar Islands जैसा मजबूत फॉरवर्ड बेस है, जो उसे प्राकृतिक बढ़त देता है.

Necklace of Diamonds रणनीति

भारत की Necklace of Diamonds रणनीति पहले से ही हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की मौजूदगी को संतुलित करने के लिए बनाई गई है. अंडमान-निकोबार कमांड को अब एक एडवांस सैन्य हब में बदल दिया गया है, जहां रडार, P-8I विमान, पनडुब्बियां और तेज अटैक क्राफ्ट तैनात हैं.

पूरी नाकाबंदी नहीं, सिर्फ खतरा बनाना लक्ष्य

भारत का लक्ष्य पूरी तरह से नाकाबंदी करना नहीं, बल्कि सी डिनायल है यानी मलक्का मार्ग को इतना जोखिम भरा बना देना कि चीन को अपने जहाजों के लिए वैकल्पिक लंबे रास्ते (जैसे सुंडा या लोम्बोक स्ट्रेट) अपनाने पड़ें.

ड्रोन बनेंगे गेम चेंजर

इस रणनीति का सबसे बड़ा हथियार ड्रोन होंगे. भारत पहले ही हजारों स्वदेशी ड्रोन विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है जिनमें निगरानी, हमला, लॉजिस्टिक्स और लूटरिंग म्यूनिशन शामिल हैं.

  • लंबी दूरी के AI स्वार्म ड्रोन दुश्मन के जहाजों पर एक साथ हमला कर सकते हैं.
  • छोटे FPV और कामिकाजे ड्रोन लगातार सस्ते हमले कर सकते हैं.
  • समुद्र में USV (अनमैन्ड बोट) और UUV (अंडरवॉटर ड्रोन) माइन बिछाने और पनडुब्बी ट्रैक करने में इस्तेमाल होंगे.

भारत का मॉडल ईरान से कैसे अलग?

जहां ईरान सीमित संसाधनों पर निर्भर है, वहीं भारत के पास मजबूत इंडस्ट्रियल बेस, तेजी से बढ़ता प्राइवेट ड्रोन सेक्टर, DRDO और आधुनिक नौसेना का सपोर्ट. इससे भारत हजारों की संख्या में ड्रोन बनाकर लंबे समय तक ऑपरेशन चला सकता है.

चीन के लिए क्या खतरा?

अगर कभी युद्ध हुआ तो भारत को हर चीनी जहाज डुबाने की जरूरत नहीं होगी. कुछ सफल हमले या माइंस की घटनाएं ही शिपिंग कंपनियों को डरा सकती हैं, जिससे, बीमा लागत बढ़ेगी, व्यापार धीमा होगा, चीन पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा.

ईरान ने जो रणनीति छोटे स्तर पर दिखाई, भारत उसे बड़े और हाई-टेक रूप में लागू करने की तैयारी कर रहा है. अगर ऐसा हुआ, तो हिंद महासागर में ताकत का संतुलन बदल सकता है और चीन के लिए मलक्का स्ट्रेट एक बड़ा रणनीतिक कमजोर बिंदु बन सकता है.

khabarmonkey@gmail.com

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