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ईरानी कालीन खरीदने में न खा जाएं धोखा…ऐसे करें असली और नकली की पहचान

ईरान में बनने वाले कालीन (फारसी या पर्शियन कालीन) को जटिल पैटर्न्स, इसमें यूज होने वाले नेचुरल धागों के लिए दुनियाभर में पसंद किया जाता है और भारत में भी इनकी काफी मांग रहती है. मुगल काल में ईरानी कालीनों की परंपरा भारत में भी शुरू हुई और इसमें धीरे-धीरे भारतीय कला भी मिलती गई. ईरानी कालीनों को कुशल कारीगरों द्वारा हाथों से बहुत ही बारीकी के साथ बुना जाता है, जिसमें अनूठी घनी गांठें होती हैं. इस वजह से ये काली कई सालों तक खराब नहीं होते हैं, लेकिन कई बार लोग नकली कालीन आपको असली कहकर महंगे दामों पर बेच देते हैं. जान लें इसकी पहचान कैसे करें.

ईरानी कालीन खरीदने में न खा जाएं धोखा…ऐसे करें असली और नकली की पहचान
ईरानी कालीन खरीदने में न खा जाएं धोखा…ऐसे करें असली और नकली की पहचान

ईरानी कालीनों को लग्जरी इंटीरियर का सिंबल भी माना जाता है. वहीं कला के प्रेमियों के लिए तो ये किसी अनमोल धरोहर से कम नहीं होती हैं. इसलिए लोग ऊंचे दाम पर भी इन कालीनों को खरीदते हैं. यूपी के भदोही, मिर्जापुर के अलावा दिल्ली के बाजारों जैसे दरियागंज, हस्तशिल्प मार्केट्स, आदि में आपको ईरानी कालीन मिल जाते हैं, लेकिन इनकी सही पहचान करना आना जरूरी है.

किनारे के फ्रिंज करें चेक

असली ईरानी यानी पर्शियन कारपेट्स में आपको किनारों पर फ्रिंज यानी झालर जैसी जरूर मिलेगी, जो इसका बेस होती हैं यानी बुनने के दौरान बचे हुए धागों से ये बनती हैं. खरीदारी के दौरान इसे ध्यान से देखें अगर किनारे की फ्रिंज को चिपकाया गया है या फिर सिला गया है तो ये नकली कालीन है.

इसके पीछे की साइड चेक करें

असली फारसी कालीनों की बुनाई हाथों से की जाती है. इस वजह से इसके पिछले हिस्से में असमानता देखने को मिल सकती है यानी ये बहुत ज्यादा फिनिशिंग वाली नहीं होगी. इसमें आपको धागे की यूनिक नॉट्स यानी गांठें दिखाई देंगी और पीछे के डिजाइन में हल्की-फुल्की खामियां हो सकती हैं, जबकि अगर कालीन को मशीन से बुना गया है तो ये पीछे से भी बिल्कुल फिनिशिंग वर्क दिखेगा और लेयर प्लास्टिक जैसी थोड़ी सख्त महसूस हो सकती है.

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इसका मटेरियल करें चेक

असली ईरानी कालीन की पहचान है कि उसे वुलन, रेशम और कपास के धागों से बुना जाता है. वहीं अगर कालीन नकली है तो इसमें आपको सिंथेटिक फाइबर दिखेंगे जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और नायलॉन के धागे. आप जब असली कालीन छूते हैं तो ये काफी लचीले और मुलायम महसूस होते हैं, क्योंकि नेचुरल धागों का यूज हुआ होता है तो वहीं सिंथेटिक धागों वाले कालीन कम लचीले होते हैं और ये ज्यादा चमकदार दिखाई देते हैं साथ ही ठंडे महसूस होंगे.

पैटर्न्स को करें चेक

असली फारसी कालीन हाथों से बनाए गए होते हैं और इसलिए ही इनमें हल्की-फुल्की चीजों में आपको चेंज देखने को मिलेगा. जैसे रंग (अब्रश) में अंतर हो सकता है. इसके अलावा पैटर्न्स को ध्यान से देखें. इनमें भी थोड़ा बहुत फर्क होता है, क्योंकि ये पूरी तरह से हाथ से बुने गए होते हैं. दरअसल कालीन पर बनाए जाने वाले पैटर्न बहुत ही बारीक होते हैं, अगर बहुत कुशल कारीगर भी इसे बनाए तो 100 प्रतिशत एक जैसे पैटर्न की गारंटी नहीं होती है. मशीन से बने कालीन में आपको पैटर्न पूरी तरह से बिल्कुल एक समान दिखेंगे.

रेशा बर्न करके देखें

आप पर्शियन रग्स यानी कालीन की पहचान बर्न टेस्ट से भी कर सकते हैं. आप इसका एक छोटा सा रेशा जलाकर देखें. अगर ये तेजी से जल जाता है और धुएं की गंध नॉर्मल स्मोकी होती है तो ये नेचुरल कपास और ऊन से बना है, लेकिन अगर ये पिघलने लगता है और प्लास्टिक जैसी गंध आती है तो ये सिंथेटिक धागों से बना नकली कालीन हो सकता है.

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