नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का बहुप्रतीक्षित आईपीओ आखिरकार शेयर बाजार में लिस्ट हो गया है। इस साल का सबसे बड़ा और देश के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा 22,561 करोड़ रुपये का यह आईपीओ सब्सक्रिप्शन के दौरान 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसे संस्थागत और हाई नेटवर्थ निवेशकों से सबसे ज्यादा जबरदस्त मांग मिली थी।

शेयर बाजार में भारी लिस्टिंग के बीच, एनएसई का शेयर बीएसई पर 15 रुपये के मामूली प्रीमियम के साथ 1,800 रुपये पर लिस्ट हुआ। हालांकि, लिस्टिंग के बाद शुरुआती कारोबार में इसमें तेजी देखने को मिली और यह करीब 4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,878 रुपये के स्तर तक उछल गया। यह शुरुआती कीमत लिस्टिंग प्राइस से 78 रुपये और इसके इश्यू प्राइस से 93 रुपये अधिक है। बाजार में आने से पहले अनलिस्टेड मार्केट में इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम लगभग 83 रुपये चल रहा था, जिससे यह संकेत मिल रहा था कि निवेशकों को शुरुआती मुनाफा मिल सकता है।
1,785 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस के आधार पर एनएसई का कुल मूल्यांकन 4.42 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि शुरुआती दिनों में शेयर की चाल पर मांग और आपूर्ति का बड़ा असर पड़ सकता है। सेबी के नियमों के अनुसार, कुछ चुनिंदा अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स को छोड़कर गैरप्रमोटर शेयरधारकों के प्रीइश्यू शेयरों को अलॉटमेंट की तारीख से छह महीने के लिए लॉकइन अवधि में रखा गया है।
जून तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, एनएसई में विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी 26.41 प्रतिशत थी। इसके अलावा, 2 लाख रुपये तक की होल्डिंग वाले व्यक्तिगत शेयरधारकों के पास 12.71 प्रतिशत और इससे अधिक होल्डिंग वाले व्यक्तियों के पास 9.58 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। एआईएफ के पास 5.31 प्रतिशत और बीमा कंपनियों के पास 0.13 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई थी।
बड़े शेयरधारकों की बात करें तो एलआईसी के पास 10.7 प्रतिशत, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पास 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा पीआई अपॉर्च्युनिटीज, निवेशक राधाकिशन दमानी, सुनील कांत मुंजाल और इंडियन बैंक जैसे बड़े नाम भी इसके प्रमुख शेयरधारकों में शामिल हैं।